वीर मराठा महादजी सिंधिया जिन्होंने 18 वीं शताब्दी में जब पूरे भारतवर्ष में त्राहि-त्राहि मची हुई थी किसी भी भारतीय शक्ति के अंदर अंग्रेजों की बढ़ती शक्ति शक्ति को रोकने का सामर्थ्य नहीं था अंग्रेजों की बड़ी एवं प्रशिक्षित सेना के सामने भारतीय ताश के पत्तों की तरह बिखर थे चले चले जा रहे थे तब अकेले महादजी सिंधिया नहीं अपने दम पर अंग्रेजों से लोहा लिया और मजबूती के साथ राजनैतिक और कूटनीतिक दोनों ही मोर्चों पर अंग्रेजों वह अपने सारे शत्रुओं को हराकर मराठा कुर्मी क्षत्रियों का वर्चस्व स्थापित किया। अंग्रेजी विद्वान विलियम जॉन्स के अनुसार महादजी सिंधिया 18 वीं सदी में सदी में दक्षिण एशिया में सबसे मजबूत व्यक्ति थे। महादजी सिंधिया का जन्म 3 दिसंबर 1730 में हुआ था अपनी योग्यता निडरता वह वीरता के कारण महादजी सिंधिया मराठा साम्राज्य में बचपन से सम्मानित किए गए। पानीपत के तृतीय युद्ध में जब मराठों व अहमद शाह अब्दाली के नेतृत्व के अंदर संयुक्त इस्लामिक शक्तियों में युद्ध हुआ युद्ध में भीषण रक्तपात हुई दोनों ही पक्षों को भारी क्षति हुई थी महादजी सिंधिया अकेले मराठा सरदार थे जो युद्...